{"product_id":"sitara-hu-chamakna-chhod-du-kaise-hindi-edition","title":"Sitara Hu Chamakna Chhod Du Kaise [Hindi Edition]","description":"\u003cp\u003eलेखक का संक्षिप्त परिचय\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eडा. ब्रज किशोर रामेश्वर दयाल शुक्ला मूलतः उत्तर भारत से हैं, उनका जम्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से करवे, सिकन्दरपुर, कन्नौज में हुआ। था. ब्रज शुक्ला में फानपुर विश्वविद्यालय से एम. एस सी. (भौतिक विज्ञान) और गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदावाद से पीएच. डी (विज्ञान) की उपाधी सी है। उन्होने अपने करिअर की शुरुआत सन १९८६ में एक वैज्ञानिक के रूप में की। आज वो वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। डा. ब्रज शुक्ला का नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड मे दर्ज है, उन्होंने दुनिया का सबसे बढ़ा दीया \"मानवता का दीया बनाकर देश को समर्पित किया है। यह दीया अहमदावाद, गुजरात के रिवरफ्रन्ट पर स्थापित है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसितारा हूं चमकना छोड़ दूं कैसे ब मैं आशिक हूं, मोहब्ब्त करना छोड़ दूँ कैसे\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eप्रिय पाठको, यह मेरा काव्य-सन्ध मेरे जीवन के पिछले 10 वर्षों की साधना है। मैं अपने शब्दों को आपको समर्पित करता है और अनुरोध करता है कि इस काव्य-ग्रन्थ को इस तरह से पढ़े कि इसका हर शब्द आपका है। मेरा यह दावा है यह काव्य-ग्रन्थ आपके जीवन का हिस्सा बनेगा, आपको सीख देगा और जीवन के हर मोड़ पर आपको प्रोत्साहित करेगा। दोस्तों, सितारा है चमकना छोड़ दूं कैसे मैं आशिक है. मोहब्त करना छोड़ द्वै कैसे मेरी आशिकी पर आपको गर्व होगा, मैं चाहूँगा कि आप भी मेरे जैसे आशिक बने और आप बनना भी चाहेंगे, क्योंकि मैंने मोहब्त की है इन्सानियत से, मानवता से, सच्चाई से और ईमानदारी से, में हर उस इन्सान से मोहब्बत करता है जो सच बोलता है और मानवता में विश्वास रखता है। हाँ मुझमें आक्रोश भी उन लोगों के खिलाफ है, जो प्यार को व्योपार बनाते हैं, किसी को धोखा देते हैं, पीठ पीछे वार करते हैं। मेरे अन्दर उन दरिन्दों के खिलाफ आक्रोश की ज्वाला है जो किसी मासूम का, किसी अबला का निर्दयता से जिस्म नीचते हैं। मेरे इस काव्य ग्रन्य में आपको सब कुछ मिलेगा, प्रोत्साहन, ऋगार, प्यार मोहब्चत, वियोग क्रन्दन, बेवफ़ाई, व्यथा, आक्रोश और शिक्षा भी।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eविद्यांता ने लिखा है क्या, पता गर चल गया होता। कदाचित हंस रहा होता, या भय में जी रहा होता।। पत्ता इतना समी संग शूल होता है। जानता गर खुशी होगी, दर्द भी सह लिया होता।।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eडॉ. ब्रज शुक्ला\u003c\/p\u003e","brand":"Best Of Used Books","offers":[{"title":"Used","offer_id":45956015849729,"sku":"32S46IUIP-Used","price":150.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0421\/4299\/0495\/files\/DrBrajShukla.jpg?v=1736922129","url":"https:\/\/bestofusedbooks.com\/products\/sitara-hu-chamakna-chhod-du-kaise-hindi-edition","provider":"Best Of Used Books","version":"1.0","type":"link"}