{"product_id":"rangarang-dohe","title":"Rangarang Dohe","description":"\u003cp\u003eरंगारंग दोहे कहें, इस युग की तस्वीर ।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eएक एक दोहा लगे, तरकस का हो तीर ।।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eदोहे की विशेषता है कम शब्दों में विस्तृत व गहरा अर्थ तथा गेय होने के कारण भावों की हृदय तक पैठ, और फिर यहां पक्के तौर पर अपनी जगह बना लेना। इन्हीं वजहों से 'दोहा' आम आदमी का अपनापन पाता रहा, और अब फिर से पाने लगा है-बीच में बिना रीढ़ की प्रगतिवादी कविता के पक्षधरों ने जरूर इसका गला घोंटने का प्रयास किया था।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइधर आठ-दस साल के अंतराल में काफी दोहे लिखे गये हैं। यह दोहे की लोकप्रियता का ही प्रमाण है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस संकलन को प्रस्तुत करते समय हमारा प्रयास रहा है कि यह एक 'प्रतिनिधि संकलन' के रूप में जन-जन तक पहुंचे। आपको यह प्रयास कैसा लगा, यह हम जरूर जानना चाहेंगे।\u003c\/p\u003e","brand":"Best Of Used Books","offers":[{"title":"Used","offer_id":45640663466241,"sku":"31XP3QE4H-Used","price":150.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0421\/4299\/0495\/files\/RangarangDohe.jpg?v=1728021982","url":"https:\/\/bestofusedbooks.com\/products\/rangarang-dohe","provider":"Best Of Used Books","version":"1.0","type":"link"}