{"product_id":"bauddh-dharma-darshan-hindi-edition","title":"Bauddh Dharma-Darshan [hindi edition]","description":"सं. एवं अनु. सिद्धार्थ\u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003e\u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003eचौदहवीं शताब्दी में धम्मकिति महासामी द्वारा गद्य-पद्य मिश्रित शैली में रचित ग्रन्थ \"सद्धम्मसङ्गहो\" पालि साहित्य एवं बौद्ध धर्म का तेरहवीं शताब्दी तक का संक्षिप्त इतिहास है। ग्यारह अध्यायों में विभक्त यह ग्रन्थ बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक तथ्यों को संक्षिप्त रूप में जानने का महत्त्वपूर्ण स्रोत है। ग्रन्थ ऐतिहासिक घटनाक्रमों के रूप में विभिन्न बौद्ध संगीतियों, अशोक के धर्म प्रचार, श्रीलंका में पालि त्रिपिटक के प्रथम लेखन और वहाँ देवानाम्पियतिस्स वट्टगामिनी अभय, महानाम और पक्का आदि राजाओं द्वारा बौद्ध धर्म को दिए गए योगदान की चर्चा करता है। संशोधित संस्करण के साथ प्रस्तुत इस ग्रन्थ का यह प्रथम हिन्दी अनुवाद के शोधार्थियों के लिए ही नहीं, पालि भाषा न जाननेवाले सामान्य पाठकों अध्येताओं के लिए भी समान रूप से उपयोगी है।\u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003e\u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003eबौद्ध साहित्य में भारतीय समाज\u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003e\u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003eडॉ. परमानन्द सिंह\u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003e\u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003eभारतीय समाज का विकास एक अखण्ड एवं नैरन्तर्यपूर्ण धारा के रूप में हुआ है। इस विशाल सांस्कृतिक धारा में वैदिक-सैन्धव सभ्यता से लेकर आज तक विविध मानव समुदाय अथवा जातियों ने अपनी-अपनी संस्कृति, धर्म भाषा और साहित्य का योगदान अर्पित किया है। इन सबके समन्वय से ही भारतीय समाज के जीवन का एक विशिष्ट स्वरूप निर्मित हुआ है। ब्राह्मण विचारधारा के साथ-साथ श्रमण विचारधारा (बौद्ध-जैनधर्म) का भारतीय समाज के विकासात्मक निर्माण में प्रमुख योग रहा है और इन्हीं के अन्तर्गत अनेकानेक सम्प्रदायों और सामाजिक नियमों का विकास होता रहा है।\u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003e\u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003eभगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के समानान्तर महाकश्यप आदि 500 बौद्ध भिक्षुओं ने राजगृह में एकत्र होकर इन बुद्धोपदेशों का त्रिपिटक के रूप में संगायन किया, जो पालि भाषा में निबद्ध है। इसमें बुद्धाभिमत अभिधर्म दर्शन के साथ-साथ व यथाप्रसंग तत्कालीन इतिहास, भूगोल, राजनीति एवं सामाजिक व्यवस्था आदि भी स्पष्टतः वर्णित है। \"बौद्ध साहित्य में भारतीय समाज\" इसी त्रिपिटक एवं उसकी अट्ठकथाओं के प्रामाणिक एवं पुष्ट साक्ष्यों के आधार पर लिखा गया है। आठ अध्यायों में विभक्त इस ग्रन्थ में ईसा पूर्व 500 से 800 ईस्वी के भारतीय इतिहास के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पक्षों पर सम्यक् प्रकाश डाला गया है।","brand":"Best of Used books","offers":[{"title":"Used","offer_id":44270319501569,"sku":"2UTR770G1-Used","price":299.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0421\/4299\/0495\/files\/81Xyzp-iozL._SY425.jpg?v=1697181957","url":"https:\/\/bestofusedbooks.com\/products\/bauddh-dharma-darshan-hindi-edition","provider":"Best Of Used Books","version":"1.0","type":"link"}